Saturday, 13 May 2017

बस का सफर भाभी के संग


दोस्तों वैसे में भी बहुत अच्छी तरह से समझता हूँ कि सेक्सी कहानियाँ पढ़ने से चुदाई की इच्छा इतनी बढ़ जाती है और उस वक़्त जो भी चूत सामने मिले मन करता है कि उसी को चोद दूँ और इस वजह से ही लोग किसी भी रिश्ते की परवाह किए बगैर सिर्फ़ चुदाई के बारे में सोचते है और अपने अंदर जल रही उस सेक्स की आग को ठंडा करते है। दोस्तों में भी कामुकता की कहानियाँ बहुत समय से पढ़ता आ रहा हूँ और यह सभी कहानियाँ पूरे बदन में लगी आग को और भी भड़का देती है।

दोस्तों अब में अपने बारे में बताता हूँ, में मिस्टर सुमित एक बंगाली लड़का हूँ और में वेस्ट बंगाल के कोलकाता शहर का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 29 साल है। में शादीशुदा हूँ और मेरी बहुत ही अच्छी, सुंदर एक पत्नी है और मेरे तीन लड़के है। दोस्तों में अपनी शादीशुदा जिन्दगी में बहुत मज़े करता हूँ, लेकिन बात तो अब वो थी कि सभी बोलते है और बहुत अच्छी तरह से जानते भी है कि एक मर्द को जितनी भी बार चूत, चुदाई करने को मिल जाए उसकी चोदने की भूख कभी कम नहीं होती, लंड कुछ देर बाद दोबारा खड़ा होकर एक प्यासी चूत में जाने के लिए एक बार फिर से तैयार हो जाता है। दोस्तों मेरे साथ भी बिल्कुल कुछ ऐसा ही है। में भी चुदाई करने का बहुत दीवाना हूँ और मुझे कोई भी प्यासी चूत मिल जाए तो में उसे चोदकर अपने लंड का दीवाना बना देता हूँ और ऐसा मैंने बहुत बार किया है। मेरे लंड से चुदकर हर एक चूत को बहुत संतुष्टि मिल जाती है। दोस्तों मैंने ऐसा अपने पड़ोस में रहनेवाली कुछ भाभियों को और अपनी तीन भाभियों को बड़े ही प्यार से पटाकर चोदा है, लेकिन हाँ मैंने कभी भी अपने बीच में बनी रिश्ते की दीवार को नहीं गिराया है।

दोस्तों में आप सभी के सामने अपनी एक पड़ोस की भाभी की चुदाई की कहानी बता रहा हूँ जिसे चोदने की मेरी इच्छा बचपन से थी जो कि अब फरवरी के महीने में पूरी हुई। दोस्तों मेरी भाभी इतनी सुंदर तो नहीं है कि जो भी उसे देखे उसका लंड भाभी को चोदने के लिए खड़ा हो जाए, लेकिन पता नहीं क्यों फिर भी में उसे हमेशा से ही चोदना चाहता था। पहले तो वो दुबली पतली सी थी और उसकी वो छोटी छोटी चूचियाँ मुझे बहुत अच्छी लगती थी, लेकिन अब वो समय के साथ साथ थोड़ी मोटी हो चुकी है और मोटे होने साथ साथ अब उसके चूतड़, बूब्स ने भी अपना आकार बदल लिया है जिसकी वजह से में उस जिस्म का बिल्कुल दीवाना हो चुका हूँ और अब उसका शरीर पहले से भी बहुत अच्छा दिखता है मतलब अब तो वो और भी चुदासी और सेक्सी लगती है। अब उसकी चुचियाँ भी बहुत बड़ी हो गयी है बिल्कुल गोल गोल, लेकिन हाँ मोटी औरतों की झूलती हुई चूचियों की तरह नहीं बल्कि एकदम टाईट है। दोस्तों जैसा कि आप लोग सेक्सी कहानियों को पढ़कर सोचते होंगे कि भाभियों को अपनी बातों में फंसाकर चोदना बहुत आसान होता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है अगर ऐसा होता तो में कब का अपनी भाभी को चोद देता और मुझे उनकी चूत मिलने में इतना लंबा समय नहीं लगता और मेरे मन की इच्छा बहुत पहले ही पूरी हो चुकी होती, लेकिन उसे चोदने का मौका मुझे इस बार मेरी अच्छी किस्मत से मिल ही गया और मैंने उसे एक बस के स्लीपर कोच में चोदा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है

दोस्तों इस बार कुछ ऐसा हुआ कि बस में हमे एक बहुत लंबा सफर तय करना था और मेरी अच्छी किस्मत से मुझे बस में एक भी सीट खाली नहीं मिली तो हमें मजबूरी में एक स्लीपर लेना पड़ा जिसकी वजह से में तो मन ही मन बहुत खुश था, लेकिन भाभी अब थोड़ा अच्छा महसूस नहीं कर रही थी और में उनकी इस बैचेनी की वजह भी बहुत अच्छी तरह से समझ चुका था। मुझे पता था कि अब उनके मन में क्या क्या चल रहा होगा और वो क्या सोच रही है? अब हम दोनों अपना सामान ठीक जगह पर रखकर बस के स्लीपर पर अपनी सीट पर चढ़कर बैठ गये और मैंने स्लीपर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और फिर में लेट गया, लेकिन भाभी अब भी बैठी हुई थी। फिर कुछ देर बाद बस चलने लगी और बाहर बहुत अंधेरा सा छा गया और अब में भाभी की पीठ पर अपना हाथ घुमा रहा था और मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था। मुझे अच्छी तरह से पता था कि मेरे ऐसा करने से भाभी गरम हो ही जाएगी, अब उससे पहले मेरा लंड उन्हें चोदने के लिए तैयार हो गया। मैंने कुछ देर बाद भाभी को लेटने के लिए कहा लेकिन भाभी नहीं मानी, ना जाने उनके मन में क्या चल रहा था? और अब मैंने उसे तुरंत जबरदस्ती पकड़कर अपने ऊपर खींचकर अपने साथ लेटा लिया और इसी खींचातानी में उसकी साड़ी का पिन खुल गया, जिसको वो अब लगाने लगी। मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और कहा कि रहने दो ना भाभी अब रात में इसे लगाकर क्या होगा? तो भाभी ने उसे वैसे ही छोड़ दिया और वो अब मेरे साथ लेट गई, दोस्तों जैसा कि में पहले भी कई बार उनके बूब्स का बहुत मज़ा ले चुका था तो में बिल्कुल निडर होकर अब अपना एक हाथ उसके बूब्स पर घुमाने लगा और भाभी मुझे ऐसा करने से कभी नहीं रोकती थी और आज भी उन्होंने मुझे ऐसा करने से नहीं रोका था। अब में धीरे धीरे भाभी के ब्लाउज के एक एक बटन खोलने लगा और फिर उसकी नंगी चूचियों को दबाने लगा, भाभी हल्का हल्का उउउहह आआहह करने लगी थी, लेकिन में तो पूरे मूड में था। में अपने पैरों से भाभी की साड़ी को ऊपर खींचने लगा और उसके पैरों पर अपने पैर रगड़ने लगा, क्योंकि मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कि वो मेरे ऐसा करने से बहुत जल्दी गरम हो जाएगी, लेकिन जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसकी पेंटी को हाथ लगाया तो भाभी अचानक से उठकर बैठ गई।


अब वो मुझे यह सब करने से रोकने लगी और मुझसे कहने लगी कि क्या तुम्हे पता भी है कि तुम मेरे साथ यह क्या कर रहे हो थोड़ा अपने आप पर कंट्रोल करो और चुपचाप सो जाओ? दोस्तों में आज रुकना नहीं चाहता था और मुझे तो आज कैसे भी उस चूत के दर्शन करने थे जिसको में इतने सालों से अपने सपनों में मेरे लंड से चुदता हुए देख रहा था तो फिर आज में कैसे पीछे हटता? अब मेरे ऊपर तो उसकी चुदाई का भूत सवार था। फिर मैंने भाभी से बोला कि भाभी प्लीज़ ऐसा मौका मुझे और कभी नहीं मिलेगा, प्लीज़ आज मुझे मत रोको और मुझे वो सब करने दो जो में करना चाहता हूँ प्लीज, लेकिन भाभी मेरे इतना कहने समझाने के बाद भी नहीं मान रही थी, लेकिन दोस्तों में भी मन ही मन ठान चुका था कि जो भी होगा देखा जाएगा। फिर में उसकी जांघों को धीरे धीरे मसलने, सहलाने लगा जिसकी वजह से भाभी अब धीरे धीरे कसमसा रही थी और में समझ चुका था कि वो कुछ समय जरुर लगाएगी, लेकिन चुदने को जरुर तैयार हो जाएगी और उस बात का फायदा उठाते हुए मैंने अपना एक हाथ धीरे से उसकी गरम, पेंटी पर रखा तो मैंने महसूस किया कि उसकी पेंटी अब भीग चुकी थी और अब में समझ गया कि भाभी भी गरम हो चुकी है, लेकिन वो मुझे अपनी चूत को चोदने नहीं देना चाह रही थी। फिर मैंने घड़ी में टाईम देखा तो मेरे पास अभी और कुछ घंटे ही बचे थे और इस बीच मुझे उनकी चुदाई के काम को पूरा भी करना था जो मेरे लिए बहुत मुश्किल था, लेकिन नामुमकिन नहीं था। फिर में अपना हाथ धीरे धीरे उसकी पेंटी पर चूत के ऊपर से रगड़ने लगा और अब मैंने महसूस किया कि भाभी का बदन अकड़ रहा था और वो ऊपर के मन से मना भी नहीं कर रही थी। अब में धीरे धीरे उसकी पेंटी को नीचे खींचने लगा और फिर मैंने पेंटी को पूरा नीचे उतार दिया और अब में अपने हाथ से उसकी उस बालों से भरी चूत को रगड़ने, सहलाने लगा वाह दोस्तों मैंने हाथ लगाकर महसूस किया कि उसकी चूत तो पूरी गीली हो चुकी थी और अब में अपनी एक उंगली से उसकी चूत को चोदने लगा और भाभी हल्की आवाज़ के साथ उुउऊहह आआहह ऊओफफफ्फ़ ऊऊफफह करने लगी। दोस्तों मैंने भी कुछ देर बाद सही मौका देखा और अपनी पेंट को उतार दिया और साथ ही साथ अपनी अंडरवियर को भी, क्योंकि मेरा लंड तो उस चूत को चोदने के लिए कब से तैयार खड़ा था और वो चूत आज मेरे हाथ में थी जिसको चोदना अब मेरा सबसे बड़ा सपना था। अब में भाभी के ऊपर आ गया और मैंने दोनों पैरों को फैलाकर अपना लंड धीरे से धक्का देकर भाभी की चूत में डाला और जैसे ही मेरा लंड भाभी की चूत में गया तो भाभी ने ज़ोर से कसकर मुझे पकड़ लिया और सिसकियाँ भरने लगी। मैंने भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए भाभी की बहुत अच्छी तरह से चुदाई कर डाली। फिर में लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देता रहा और वो मेरे लंड के अंदर बाहर होने के साथ साथ सिसकियाँ लेने लगी। बस मैंने करीब बीस मिनट तक चुदाई का पूरा मज़ा लिया और मैंने अपना वीर्य चूत में डाल दिया, लेकिन कुछ बाहर भी निकला जिसको भाभी ने साफ किया ।।

Tuesday, 4 April 2017

नोकरणीला असे झवावे




माझ्या बहिणीचे लग्न होते, आम्ही गावाला गेलो होतो आणि मी एकदम उदास होतो कारण कि जो पर्यंत मी दिल्ली मध्ये असतो तो पर्यंत मला पुच्चीची कधी कमी होत नाही. इथे माझ्या कोन्टेक्ट मध्ये खूप भाभी आणि आंटी होत्या तर मी त्यांच्या कडून माझे काम करून घेत होतो, पण आता गावाला माझे काय होणार असे विचार करून मी एकदम उदास झालो होतो. पण जायचे तर होतेच. मग मी जेव्हा तिथे गेलो होतो तेव्हा पाच सहा दिवस सर्व काही एकदम नॉर्मल होते पण हळू हळू मला जोश येऊ लागला होता, पण मी काही करू शकत नव्हतो.

मग मी लक्ष दिले तिथे एक काम करणाऱ्या कामवाली वर. ती दिसायला काळी होती पण तिचे फिगर एकदम मस्त होते. मी विचार केला कि हिला पटवले तर मी इथे असे पर्यंत माझे काम निघून जाईल. मग मी तिला नेहमी प्रेमाने बोलवत होतो आणि माझ्या कडे जे खायला असेल ते तिला देत होतो. ती ते सर्व पाहत होती. मी तिला लपून खायला देत होतो आणि ती खुश होत होती.

एक दिवस ती काम करत होती आणि तेव्हा मी डाळिंब खात होतो तर मी तिला म्हणले कि खाऊन घे. तर ती माझ्या समोर वाकली होती आणि तिचे मस्त बोल मला दिसले होते, ती जेव्हा माझ्या कडून घेत होती तेव्हा माझा खांदा तिच्या बोल ला घासला होता, तेव्हा तिने काही लक्ष दिले नाही, मी म्हणले कि निवांत खाऊन घे, कोणी येणार नाही, मग ती बसली होती, मग मी हळू हळू माझे खांदे तिच्या बोल वर घासू लागलो होतो, तिला समजले आणि ती उठली होती जसे रागावली असेल, मग मी पण एकदम घाबरलो होतो कि ती कोणाला काही सांगणार तर नाही ना.

मग मी तिला दुसरा दिवस जवळ बोलवले होते आणि तिला काही पैसे दिले होते, ती नाही म्हणत होती. मग मी तिला म्हणले कि तुझ्या साठी चांगले कपडे घे, तर ती मला पाहू लागली होती आणि म्हणली कि मी माझ्या पतीला खूप प्रेम करते आहे. मग मी विचारले कि तुझा पती कोठे आहे? तर ती म्हणली कि बाहेर गेले आहेत त्याला ६ महिने जाले आहेत, तर मी म्हणले कि तू कसे काय एकटी राहून घेतेस? तर तिने म्हणले कि तुम्ही काय करता? तर मी तिला माझी सर्व माहिती सांगितली होती कि मला दिल्ली मध्ये मुलींची काही पण कमी नाही आहे. तर ती हसू लागली होती.

मला वाटले कि आता काही तरी काम होईल, मग मी तिला म्हणले कि मी तुला १००० रुपये देतो, पण तू रात्री माझ्या कडे ये. मग ती ऐकली होती आणि तिने ११ वाजता मला मोबाईल वर कोल केला होता आणि सांगितले कि मी बाहेर उभी आहे, दरवाजा उघडा. मी पटकन दरवाजा उघडला होता आणि ती आत मध्ये आली होती, मग मी दरवजा बंद करून टाकला होता, मग मी तिला पाहून एकदम खुश झालो होतो. मी सरळ तिचे कपडे काढू लागलो होतो आणि ती पाहत राहिली होती, तिचे पूर्ण शरीर काळे होते पण तरी तिचे मादक शरीर मला आवडत होते.

तिची पुच्ची केसा मध्ये लपली होती, मला राहवले नाही आणि मी तिच्या पुच्ची वर माझे तोंड लावले होते, ती एकदम लाजली होती, मग मी तिला बेड वर झोपायला सांगितले होते पण ती झोपली नाही. मी उभे उभे तिच्या पुच्चीला एकदम जोर जोराने चाटू लागलो होतो आणि तिचे बोल एक एक करून तोंड मध्ये घेऊ लागलो होतो, बहुतेक १० मिनिट मध्ये ती एकदम गरम झाली होती आणि मला कीस करू लागली होती, मी परत तिला धक्का दिला होता आणि तिला बेड वर झोपवले होते आणि तिचे पाय पसरले होते, मग मी पटकन तिच्या पुच्ची वर माझे तोंड लावून दिले होते.

मग ती आधी मला विरोध करत होती आणि दूर करत होती पण मी ऐकले नाही आणि ५ मिनिट नंतर ती स्वतः माझे तोंड पकडून तिच्या पुच्ची वर दाबू लागली होती, मी माझी जीभ तिच्या पुच्ची मध्ये टाकून दिली होती, ती एकदम तडफड करत होती आणि माझी जीभ चोकत होती, तिच्या साठी हे नवीन होते, मग ती म्हणली कि आता उशीर करू नकोस, मला ठोकून दे, मला समजले कि आता उशीर केला तर तिचे निघुन जाईल, मग मी माझा लंड तिच्या पुच्ची वर ठेवला होता.

माझा लंड काही जास्त नाही पण ६ इंच होता, तिला पण राहवले नाही आणि तिने पुच्ची मध्ये लंड टाकून घेतला होता, कारण कि १० दिवस झाले मी पण एकदम भुकेला होतो, तर मला भीती होती कि माझे लवकर निघून जाणार नाही ना, मग मी माझ्या जिभेने तिची पुच्ची खूप चाटली होती, ती एकदम वेडी झाली होती. मग तिने माझा लंड तिच्या पुच्ची मध्ये घेतला होता आणि आता मला पण कंट्रोल झाले नाही.

मी माझा लंड टाकून तिचे बोल तोंड मध्ये घेऊन चोकू लागलो होतों, ती हळू हळू हलत होती आणि मला समजले कि आता जास्त उशीर केला तर मी तडफड करत राहून जाईन, मग मी तिला जोर जोराने झटके मारू लागलो होतो.

आम्ही दोघे थंडी मध्ये पण एकदम घामाघूम झालो होतो, तिने अचानक तिचे शरीर एकदम टाईट करून घेतले होते आणि मला जोराने पकडले होते, मला समजले कि तिचे निघाले आहे, मी १०-१५ झटके मारले होते आणि मी पण पाणी काढून टाकले होते, तिने म्हणले कि तू तर माझ्या पती पेक्षा पण चांगले ठोकत आहेस, कोठून शिकले आहे हे सर्व?


तर मी तीला लेपटोप वर मूवी लावून दिली होती आणि मी तिला तसे ठोकू लागलो होतो, ती सर्व पोज करू शकत नव्हती, पण आम्ही रात्री च्या ३ वाजे पर्यंत सेक्स करत होतो, त्या नंतर तिने म्हणले कि आता मला जावे लागेल पण आता तू मला रोज ठोकत जा. तू म्हणशील तिथे मी येते. मग मला तर विश्वास बसला नाही कि हि तीच मुलगी आहे जी म्हणत होती कि मी माझ्या पती वर खूप प्रेम करते आहे.

मग मी तिला म्हणले कि ठीक आहे, मग आम्ही जिथे जागा मिळेल तेव्हा एकदम मस्त जोर जोराने ठोकत होतो, एक वेळा तर मी तिला वोशारूम मध्ये ठोकत होतो आणि अर्धा तास पर्यंत मी तीला ठोकत होतो तरी तिने पण काढले नाही आणि मी पण माझे पाणी काढले नाही, मग कोणी तरी दुसरा माणूस येऊ लागला होता, तर आम्ही लपून  गेलो होतो आणि तो गेला कि मग जेव्हा मी जाऊ लागलो होतो तेव्हा तिने माझा हात पकडला होता आणि म्हणले कि मला असे अर्धे तहानलेले सोडून जाऊ नकोस, मग आम्ही एकदम जोर जोराने सेक्स केले होते आणि खूप वेळ पर्यंत मी तिला ठोकले होते. मग माझी नजर तिच्या बहिणी वर पडली होती, ती थोडी सुंदर होती पण तेव्हा गर्भवती होती, त्या मुळे मी विचार केला कि परत गेलो कि तिला ठोकून देईन.
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Saturday, 25 March 2017

गावाच्या भाभीची मस्तीने भरलेली पूची


गावाच्या भाभीची मस्तीने भरलेली पुच्ची

हेल्लो मित्रांनो मी राज आहे रोहतक चा आणि आज माझी एकदम नवीन गोष्ट घेऊन आलो आहे, माझी उंची ६ फुट आहे आणि मी एकदम तगडा आहे, मला जिगोलो बनायचे आहे.

मित्रानो मी नोवेंबर मध्ये एक एजन्सी बरोबर संपर्क केला होता. त्यांनी माझ्या कडून दहा हजार रुपये जमा करून घेतले होते आणि म्हणले कि दोन तास नंतर तुम्हाला तुमच्या ग्राहक चा फोन येईल.

पण असे काही जाले नाही.

मग मी त्या एजन्सी वाल्यांना कोल करू लागलो होतो तर त्यांचा फोन पण बंद येत होता.

मग मी एकदम उदास झालो होतो.

मग हि घटना या वर्षी सप्टेंबर ची आहे, मी माझ्या बुआ च्या घरी काही दिवस रहायला गेलो होतो जी रोहतक च्या जवळ एक गावा मध्ये राहते आहे.

माझ्या बुआ च्या घरी बुआ फुफा आणि त्यांचा एक मुलगा सोनू राहत आहेत, सोनू चे वय २१ वर्षे होते आणि माझे फुफा सरकारी नोकरी करत आहेत.

मी बुआ च्या जवळ गेलो होतो तर सर्व लोक घरी होते, मला पाहून सर्व लोक एकदम खुश झाले होते आणि बुआ आणि फुफा बरोबर मी असेच गप्पा मारल्या.

मग संध्या काळी मी बुआ च्या गच्ची वर गेलो होतो आणि फिरू लागलो होतो, मी पहिले कि आजू बाजूला घरा मध्ये खूप सुंदर आणि जवान स्त्रिया होत्या.

मग मी एक घरा कडे पहिले जे बुआ च्या घर च्या एकदम जवळ होते तेव्हा मला दिसले कि एक सावळी स्त्री चुलीवर जेवण बनवत होती, मी काही वेळ पाहत राहिलो आणि माझी आणि तिची नजर मिळली होती आणि मग ती परत माझ्या कडे पाहून जेवण बनवू लागली होती.

मग काही वेळाने मी खाली आलो होतो आणि मी बुआ ला तिच्या घर च्या विषयी विचारले तर तिने म्हणले कि ती आपल्या कुटुंब ची आहे आणि तुझी भाभी लागते आहे, तिचा पती आणि देवर दोघे एकदम दारुडे आहेत आणि ते ड्रग्स पण घेतात आणि ते मिळून त्या बिचारी ला खूप मारत असतात.

मग हे ऐकून मला तिची खूप द्या आली होती आणि मग मी त्या भाभी ला कसे पटवायचे याचा विचार करू लागलो होतो.

भाभी चे नाव राणी होते, तिची फिगर काही खास नव्हती, लहान लहान बोल होते आणि तरी माहिती नाही कि मला तिची पुच्ची मारायची इच्छा होत होती. तिचे घर माझ्या बुआ च्या घर च्या एकदम समोर होते.. मध्ये फक्त एक १० फुट ची गल्ली होती, ते लोक वर राहत होते, खाली पण एक रूम होता आणि बरोबर म्हशी बांधायची मोकळी जागा होती.

भाभी च्या घर मध्ये भाभी, तिचा पती, तिची सासू, आणि त्यांचा दारुडा देवर आणि दोन मुले राहत होती ज्या मध्ये एक मुलगी ९ वर्ष ची आणि एक मुलगा ६ वर्षाचा होता.

मग मी काल च्या सारखे परत गच्ची वर गेलो होतो, तर भाभी बाल्कनी मध्ये बसून भाजी चिरत होती.


मग आमची नजर भेटली होती, मग भाभी तिच्या कामा मध्ये लागून गेली होती, मी गच्ची वर फिरू लागलो होतो.

आता भाभी माझ्या कडे पुन्हा पुन्हा पाहत होती आणि मग मी पण एक जागी उभा राहून तिला पाहू लागलो होतो, ती मला पाहत होती आणि मग भाजी चिरू लागत होती, हे पाहून माझा लंड आता कडक होऊ लागला होता.

मग मी परत भाभी कडे पाहिले आणि या वेळी थोडे स्माईल केले होते पण तिने काही उत्तर दिले नाही.

मग ती पण पाहत होती आणि मी हसून देत होतो आणि असे वाटत होते कि तिला हसायला येत नव्हते.

मग मला वाटले कि हि काही माझ्या कडून पटणार नाही आहे. पण मना मध्ये इच्छा होती कि हिला पोट भरून जवायचे आहे.

मी दुसरा दिवस सकाळी गच्ची वर गेलो होतो आणि फिरू लागलो होतो, भाभी च्या घर च्या दिशेने पाहू लागलो होतो आणि ती म्हशीना चारा टाकत होती, मी काही गुणगुणत होतो तर तिने वर पहिले होते आणि मग ती परत तिचे काम करू लागली होती.

आता ती माझ्या कडे काही पाहून मला किंमत देत नाही हे पाहून मला राग आला होता.

मग मी खाली आलो कि माझी बुआ म्हणली कि तुझे फुफा, मी आणि सोनू रोहतक ला जाणार आहे, दुपारी पर्यंत आम्ही येतो, तू घरीच राहा.

मी म्हणले कि ठीक आहे बुआ.

मग ते सर्व ९ वाजता रोहतक साठी निघून गेले होते, मी खाटेवर झोपलो होतो आणि भाभी चे स्वप्न पाहू लागलो होतो कि ती जर आता इथे आली तर तिला पकडून एकदम ठोकून देईन.. तिची पुच्ची चाटेन.. तिचे बोल दाबेन आणि तिला एकदम घोडी बनवून ठोकेन.

हे विचार करत करत मी माझा लंड कुरवाळू लागलो होतो आणि मग मी विचार केला कि भाभी ला पाहून मुठ मारली तर कसे राहील? मग मी उठलो होतो आणि थोडी खिडकी उघडून माझा लंड हात मध्ये घेतला होता आणि भाभी च्या घरा कडे पाहू लागलो होतो.

भाभी कोठे दिसत नव्हती, बहुतेक ती खाली असेल. मग भाभी दिसली होती आणि ती आली आणि समोर खाली बसून पीठ बनवत होती, ती कमक करत असताना मला तिचे बोल एकदम मस्त दिसत होते.

मी तिला पाहून माझा लंड हलवू लागलो होतो आणि मग ती उठली होती आणि आत मध्ये जाऊ लागली होती, मी पण लंड आता एकदम जोर जोराने हलवू अल्गलो होतो आणि मग भाभी काही उचलायला वाकली होती आणि तिची गांड माझ्या कडे झाली होती, मी माझी मुठ मारायची स्पीड एकदम वाढवली होती आणि त्या वेळी माझ्या लंड ने खूप सारे पाणी बाहेर काढून दिले होते.

मी खिडकी मधून तिला पाहत होतो आणि ती कधी बाहेर येत होती कधी आत मध्ये जात होती, मग ती वरून तिचे काम करून खाली निघून गेली होती. मी बेड वर झोपलो होतो.

थोड्या वेळाने मला काही आवाज आला होता आणि कोणी तरी माझ्या बुआ ला आवाज देत होते.

मी उठलो होतो आणि पहिले कि ती भाभी आवाज देत होती, मी म्हणले कि भाभी माझी बुआ रोहतक ला गेली आहे आणि दुपार पर्यंत परत येईल.

मग ती म्हणाली कि मला थोडी लस्सी मिळेल का?

मग मी म्हणले कि भाभी आत मध्ये असेल.. वर येऊन पाहून घ्या.

भाबी वर येऊ लागली होती आणि माझा लंड आता उभा होऊ लागला होता आणि माझे श्वास पण वाढले होते.

मग भाभी वर आली होती नि किचन मध्ये गेली होती, मी पण तिच्या मागे किचन मध्ये गेलो होतो.




मग भाभी ला इतके जवळ पाहून मला एकदम घाम आला होता.

भाभी म्हणाली कि घरी कोणी नाही आहे का?

तर मी म्हणले कि नाही सर्व लोक बाहेर गेले आहेत.

मग मला वाटू लागले कि जे होईल ते होईल.. आज तर हिला पकडून घेतो.

भाभी लस्सी घेऊन जाऊ लागली होती आणि जसे ती फिरली होती तेव्हा भाभी ची गांड मी दाबून दिली होती आणि म्हणले कि भाभी आज त दे हि दे न.

भाभी काही म्हणली नाही आणि जाऊ लागली होती तर मी तिला मागून एकदम पकडून घेतले होते आणि भाभी चे गाल मी कीस करू लागलो होतो.

मग तिने म्हणले कि वेडा झाला आहेस का, मला सोडून दे.

मग ती सोडवायचा प्रयत्न करू लागली होती.

मग मी म्हणले कि भाभी आज दे ना मला.. नाही तर मी मरून जाईन.

मग मी तिला मागून पकडून तिचे बोल दाबू लागलो होतो.

ती काही म्हणाली नाही.

मग मी पेंट ची चेन उघडली होती आणि माझा लंड काढला होता आणि भाभी च्या कपड्या वरून तिची गांड वर लावत मी तिचे बोल दाबू लागलो होतो.

मग भाभी एकदम मस्त होत होती आणि म्हणली कि तू ऐकणार नाहीस.. पण हे बघ तू कोणाला काही सांगू नकोस.

मग मी म्हणले कि ठीक आहे भाभी.

मग ती माझ्या कडे फिरली होती आणि मला मिठी मारली होती, आता मी तिचे ओठ कीस करू लागलो होतो आणि ती साथ देत होती.

मग काही वेळाने ती म्हणाली कि माझी सासू दुकानात बेसन घ्यायला गेली आहे.. आता परत येणार आहे, आता मी जाते आहे.

मी म्हणले कि भाभी एक वेळा करू दे.. मग तू निघून जा.

मग तिने नाही नको म्हणत कसे तरी ऐकले होते.

मी भाभी ला किचन मध्ये जायला सांगितले.. तर ती किचन मध्ये आली होती आणि मग मी तिच्या सलवारी चा नाडा काढून टाकला होता. तिची सलवर पटकन खाली आली होती आणि मग मी भाभीला वाकायला सांगितले होते आणि मग भाभी किचन मध्ये वाकून राहिली होती.

मग मी तिची पुच्ची पहिली कि एकदम केसाने भरलेली होती आणि मग मी तिची पुच्ची काही २० सेकंद चाटली होती.

मग ती म्हणाली कि लवकर कारून घे, माझी सासु येणार आहे.

मी पण उशीर केला नाही आणि लंड पकडून भाभी च्या पुची मध्ये टाकू लागलो होतो पण लंड एकदम घसरून जात होता.

मग तेव्हा भाभी ने माझा लंड पडकला होता आणि पुच्ची वर लावला होता आणि म्हणली कि आता ठोक.

मग मी हळूच झटका मारला होता तर थोडा आत मध्ये गेला होता, भाभी अहः उऊ उऊ आय्य इऔओउ म्हणली होती, मग मी हळू हळू धक्के मारू लागलो होतो तेव्हा तिचे श्वास पण एकदम वाढू लागले होते.

मी माझी स्पीड हळू हळू वाढवली होती आणि तिचे डोळे पण एकदम मस्ती ने बंद झाले ओह्ते आणि मग ती माझ्या लंड ची मजा घेत होती.

२-३ मिनिट नंतर ती म्हणली कि आह्ह औऊ अजून जोराने कर..

मग तेव्हा भाभी च्या पुचीने माझा लंड पकडला होता आणि तिने एकदम पाणी काढून टाकले होते.

मग मी तिला काही ५-७ धक्के मारले होते आणि मग माझे पाणी काढून टाकले होते.

मग मी लंड पुच्ची मधून काढला होता आणि तिला उभे केले होते आणि सलवार बांधली होती आणि मग ती किचन मधून बाहेर आली होती, मग ती म्हणली कि मी तुला परत बोलवून घेईन.

मग ती हसत हसत निघून गेली होती.

मग मी त्या नंतर भाभी ला तिच्या घरा मध्ये खूप ठोकले होते..

भाभी प्रेग्नंट झाली होती.

मित्रांनो हि एकदम खरी गोष्ट आहे.



माझे वय ३५ आहे माझे नाव स्वाती आहे. माझे लग्न झाले आणि मी मुंबईत आले. माझे मिस्टर एका कंपनीत ऑफिसर आहेत. त्यामुळे ते महिन्यातून २-३ वेळा परदेशात जात असतात. आमचा बंगला ज्या भागात आहे तेथे थोडी झाडी आहे आणि काही अंतरावर आणखीन बंगले आहेत. त्यामुळे सुरक्षेसाठी माझ्या मिस्टरानी बंगल्यात एक गुरखा ठेवण्याचे ठरवले. कारण बंगल्यात आम्ही दोघेच राहत होतो. आणि हे सारखे बाहेर देशात जात होते. मग पेपरला जाहिरात दिल्यामुळे काही जन गुरखा म्हणून आले. त्यावेळेस हे बाहेर असलेने त्यांची मुलाखत मलाच घ्यायला लागली आणि मी सर्वाना बोलावून त्याची मुलाखत घेतली. त्यामध्ये मला एक गुरखा त्याचे नाव शेरपा होते. त्याचीच मी निवड केली. शेरपा अंगाने मजबूत आणि उंच होता रंग देखील गोरापान होता. आणि त्याला पाहिल्यावर माझ्या मनात तो लगेच भरला. मग तो बंगल्यात आल्यानंतर त्याला तिची खोली दाखवली आणि बंगल्याची राखण करण्याची जबाबदारी त्याला दिली.

तोही खुश होऊन जी मेमसाब असे म्हणत कामाला लागला. त्याचे वय साधारण २६-२७ असेल तो जवानीत होता. एके दिवशी हे परदेशी गेले होते. आणि ते २५ दिवसांनी येणार होते. या दरम्यान त्यांनी सर्व जबाबदारी शेरपा वर सोपवली आणि ते निघून गेले. मग रात्री तो बाहेर पहारा देत असे. मी ही वरती माझ्या बेडरूम मध्ये एकटीच झोपू लागले. मला तो एकांत खायला उठत होता. कारण माझ्या शरीराची भूक माझ्या नवऱ्याकडून भागात न्हवती आणि सारखे ते बाहेर जात होते. त्यात बाहेर उभा असलेला तो तरुण गुरखा त्याचे बलदंड शरीर आणि त्याचा मोहक चेहरा माझ्या सारखा डोळ्यासमोर येत होता. मी चोरून चोरून त्याला वरच्या खिडकीच्या काचेतून पाहत होते तो एकसारखा बाहेर पहारा देत होता. मी त्याला वरून खाली डोळे भरून पाहत होते. आणि बेडवर पडून दोन्ही हातानी स्वताचे सर्वांग चोळत असे. माझे स्तन दोन्ही हातानी दाबत असे आणि बोटे सारखी तोंडात घालत असे.

आता माझी वासना पेटून उठत होती. आणि तो गुरखा सारखा डोळ्या समोर येत होता. एके दिवशी मनाशी ठरवले आणि रात्री ११ वाजता मी शेरपाला वरती हाक मारली. तो लगेच एस मेमसाब म्हणून वरती आला. त्याला आत बोलावले. आणि त्याला थोडे खायला दिले तो खावून झाल्यावर मै जावू क्या असे म्हणाला पण तिने तू थोडे थांब मला भीती वाटते असे सांगून बाहेरचा दरवाजा लावला. मग तोही थोडा अजम्बित झाला. आता माझी वासना फार पेटली होती मला राहवेना म्हणून मी लगेच उठून त्याच्या जवळ गेले आणि त्याला घट्ट मिठी मारली मग त्याने मला दूर करत क्या कर ते हो मेमसाब असे तो म्हणाला मग मी त्याला म्हणाले तुला पहिल्या पासून माझ्या काळजाची आग होवू लागली आहे आणि ती आज तूच शांत करू शकतोस असे म्हणून तिने त्याला आत बेडरूम मध्ये नेले आता गुरखा देखील चेकाळला इतकी सुंदर स्त्री स्वताहून आपणास चेतावते म्हणून त्यानेही मग पुढाकार घेतला.

आणि मला घट्ट मिठी मारली आणि पलंगावर झोपवून नागडी केली आणि आपणही नागडा झाला त्याचा सोटा पाहून मी खूप कुश झाले मी तो लगेच हातात पकडला आणि चोकू लागले त्यानेही मग माझ्या तंगड्या फाकवून माझ्या पुच्चीत तोंड घातले आणि चोकू लागला माझ्या अंगाची आग फारच भडकली आणि मी त्याला खाली पडून त्याचा लवडा उभा करून यावर बसले. बसताना त्याचा लवडा हातात पकडून माझ्या पुच्चीत खालून घेतला आणि वरून अगदी जोरजोराने धक्के मारू लागले. मग आमच्या तोंडातून नकळत विव्हळण्याचा आवाज येवू लागला. मग तो गुरखा पेटला आणि त्याने मला कचकच झवून काढले.

लंड चोखला

मी मयुरीच्या योनीत पचापच माझा दमदार लंड आत बाहेर करत होतो. अंजली मयुरीचे स्तन दाबत तिच्या योनीत आत बाहेर होणार्या माझ्या लंड कडे टक लावून पाहत होती. अंजली आमच्या शेजारच्या बंगल्यात रहात होती. मयुरी आणि तीचा नवरा दिनदयाल अंजलीकडे घरकाम करत होते अंजली एक नंबर सेक्सी होती. माझे तिच्याशी शरीर संबंध येण्यागोदर ती नोकर दीनदयाल कडून शरीराची आग विझवून घेत होती. मयुरी मला आवडली होती. अंजलीने तिला माझ्यासाठी तयार केले होते आणि आज मी तिच्या उन्मादक देहाचा उपभोग घेत होतो. अचानक मी मयुरीच्या देहावर धपापत विसावलो. मी स्खलित होत होतो. माझा गरमागरम विर्य्र रस मयुरीच्या योनीत टपकत होता. त्याचवेळी तिच्या योनीतून उडालेला फवारा माझ्या दांडक्याला आंघोळ घालत असल्याची जाणीव मला झाली होती. मी आणि मयुरी जोरजोरात श्वास घेत एकमेकांना बिलगलो होतो. मी माझा श्वास नियंत्रणात आणत होतो. अंजली हि मयुरीपासून बाजूला झाली होती. माझा दांडका नरम होऊन मयुरीच्या योनीतून बाहेर पडताच मी तिच्यापासून वेगळा झालो. त्याचवेळी समोर उभ्या असलेल्या मयुरीच्या नवर्यावर, दिनदयाल माझी नजर पडली होती. ‘ओह साहेब… काय केलत हे तुम्ही… माझ्या बायकोला नासवलात हे चांगले केले नाही तुम्ही…’ दीनदयाल काहीसा रागात म्हणाला मी काहीसा हडबडलो होतो. पण अंजली पक्की वस्ताद होती. त्याच्यासमोर हात नाचवत ती म्हणाली, ‘दीनदयाल… उगाच नखरे करू नकोस… तू हि ये न मैदानात.

अंजली थांबली नाही. तिने माझ्या समोरच दिनदयालयालची लुंगी सोडली. तो तिचा नोकर होता. दोघांनी अनेकदा शरीरसुख लुटले होते. तिने त्याला पूर्ण नग्न केले. मी मात्र काहीसा संकोचलो होतो. मी आणि मयुरी चकित होऊन अंजलीकडे पाहत होतो. त्याचा लंड ती चोळू लागली तो ताठ होऊ लागला. पाहता-पाहता त्याचा लंड एकदम ताठ झाला. अंजलीने त्याच्या दांडक्याजवळ तोंड नेले आणि त्याच्या लंड तोंडात घेऊन चोखू लागली. त्याचा सोटा चोखताना ती त्याच्या गोट्याही गोंजारत होती. दीनदयालही रंगात आला होता. उभ्या उभ्या कंबरेला झटके देत तिच्या तोंडात दांडका आत बाहेर करत होता. मी आणि मयुरी डोळे फाडून अंजलीचे कामुक चाळे पाहत होतो. अंजली इतकी कामुक वृत्तीची तरुणी होती कि आमच्या समोरच नोकराचा सोटा तोंडात घेऊन भसाभस आतबाहेर करत होती. मयुरीलाही त्यांच्यातील संबंधाची कल्पना नसावी. तिच्या नवर्याबरोबर मालकीण कामुक चाळे करत असूनही ती काही बोलत नव्हती. अंजलीच्या ओठांची वेगाने हालचाल होत होती. तिचे गाल फुगले जात होते. मस्तीत येवून ती त्याचा पूर्ण लंड तोंडात सामावून घेण्याचा प्रयत्न करत होती. तिच्याकडे पाहून असे वाटत होते कि ती जणू त्यांचा दांडका खावूनच टाकणार आहे. दीनदयाल उभा होता. ती त्याच्या पायाशी वसली होती. त्याचा लंड तोंडातून बाहेर काढून आमरस चाटवा त्याप्रमाणे चाटत होती. तिच्या अंगावर नावाला कपडा नव्हता. तिचे मोठे मोठे स्तन हिंदकळत होते. दीनदयाल तिचे स्तन एका हाताने जोरात दाबत होता. क्षणा क्षणाला दोघांची उत्तेजना वाढत होती. अंजलीचा चेहरा गुलाबी झाला होता. तिच्या डोळ्यात नशा उतरली होती. दिनदयालच्या चेहर्यावरही वासना दिसत होती. त्याचे डोळे लाल झाले होते. तो तिच्या तोंडात पूर्ण दांडका सारण्याचा प्रयत्न करत होता. मी आणि मयुरी चकित होऊन त्यांच्याकडे पाहत होतो. आम्ही दोघांनी काही वेळापूर्वीच संभोग सुखाचा आनंद लुटला होता. त्यामुळे एवढ्यात उत्तेजना येणार नव्हती. तेवढ्यात त्याने अंजलीच्या योनीतून दांडका बाहेर काढला. त्याचा दांडका माझ्या माझ्यासारखाच दमदार होता. तिच्या तोंडातील थुंकीने भिजून चमकत होता. अंजली त्याचा दांडका ती मुठीत धरून हलवू लागली. त्याचवेळी त्याचा दांडा तिच्या चेहर्यासमोर होता. त्याचा दांडका उसळी मारत होता. ती वेगाने हलवू लागताच त्याच्या दांडक्यातून वीर्याची पिचकारी उडाली. पिचकारी अंजलीच्या चेहऱ्यावर उडाली होती. ती टपकणारे वीर्य तोंडात घेत होती. अंजली किती सेक्सी आहे हे मी पाहत होतो.

तिने त्याचा दांडका तोंडात घेतला आणि विर्याचा थेंब न थेंब चोखू लागली. त्याचा लंड तिने चोखून चोखून स्वच्ह केला होता. तिने टोवेलने चेहरा पुसला. दिनदयालने त्याच्या पत्नीसोबत सेक्स करताना मला पहिले होते म्हणून मी काही बोलू शकत नव्हतो. दीनदयाल आता तिचे स्तन चोखत होता. योनी चोळत होता. ती उन्मादाने चित्कारत होती. मग तो उठला. तिच्या मांड्या फाकवून तिची योनी चाटू लागला. तीही नितम्बाची हालचाल करीत त्याच्या ओठांवर योनी रगडत होती. अंजली रंगात आली होती. दीनदयाल योनी चाटता-चाटता तिच्या योनीत जीभ घुसवत होता. त्याची जीभ योनीत घुसू लागताच ती नितंब वर फेकीत त्याची जीभ खोलवर घुसवून घेण्याचा प्रयत्न करत होती. योनी चाटत असताना त्याचा दांडा परत ताठ होऊ लागला होता. पूर्ण ताठ होताच त्याने तिच्या पुचीवर टेकवले आणि जोर जोरात दणका मारला.

तिने त्याचा दांडका तोंडात घेतला आणि विर्याचा थेंब न थेंब चोखू लागली. त्याचा लंड तिने चोखून चोखून स्वच्ह केला होता. तिने टोवेलने चेहरा पुसला. दिनदयालने त्याच्या पत्नीसोबत सेक्स करताना मला पहिले होते म्हणून मी काही बोलू शकत नव्हतो. दीनदयाल आता तिचे स्तन चोखत होता. योनी चोळत होता. ती उन्मादाने चित्कारत होती. मग तो उठला. तिच्या मांड्या फाकवून तिची योनी चाटू लागला. तीही नितम्बाची हालचाल करीत त्याच्या ओठांवर योनी रगडत होती. अंजली रंगात आली होती. दीनदयाल योनी चाटता-चाटता तिच्या योनीत जीभ घुसवत होता. त्याची जीभ योनीत घुसू लागताच ती नितंब वर फेकीत त्याची जीभ खोलवर घुसवून घेण्याचा प्रयत्न करत होती. योनी चाटत असताना त्याचा दांडा परत ताठ होऊ लागला होता. पूर्ण ताठ होताच त्याने तिच्या पुचीवर टेकवले आणि जोर जोरात दणका मारला. पाहता पाहता त्याचा पूर्ण दांडका तिच्या योनीत शिरला होता. तो दणादण दणके देऊ लागला. त्याचा दांडका वेगाने तिच्या योनीत आतबाहेर होऊ लागला. तो दमदार दणके देत लंड तिच्या योनीत घुसळत होता. ती देखील नितंब वर फेकत त्याचा दांडका योनीत खोलवर सामावून घेत होती. दणके देताना तो तिचे वर-खाली होणारे स्तनही दाबत होता. मी तिच्या चेहऱ्याकडे पाहिले. तिचा चेहरा आनंदाने फुलून गेला होता. तिच्या तोंडून माधक चित्कार बाहेर पडत होते. ती दाताखाली ओठ दाबून चित्कारत होती. त्याच्या कंबरेभोवती ती पायांचा विळखा घालून उसळत होती. दोघामध्ये घनघोर लढाई जुंपली होती. दणक्याची गती वाढली होती. योनीत घुसताना येणारा पचापच आवाज खूपच मोहक होता. तो तिच्या देहाचा धुंदपणे आस्वाद घेत होता. काही वेळाने दिनदयालने आपला दांडा तिच्या पुचीतून बाहेर काढला तसा तिच्या पुचीतून पांढरा स्त्राव बाहेर येऊ लागला.

त्यानंतर अर्धा तास आम्ही आराम केला. मग आम्ही चौघेही मध्यपान करू लागलो. अंजलीने दीनदयाल आणि मयुरीलाही मद्यपानाची सवय लावली होती. तिने ब्लू फिल्म लावली. मद्याचे घोट घेत आम्ही ब्लू फ्लीम पाहत होतो. फिल्म एकदम गरमागरम होती. त्यात दोन मित्र आणि दोन मैत्रिणीचा प्रणय खेळ दाखवण्यात आला होता. फिल्ममधील सेक्सी सीन पाहून मद्याचा नशेबरोबर आमच्या देहात वासनेची नशा चढत होती. आम्ही दोघे कधी मयुरीचे तर कधी अंजलीचे स्तन दाबत होतो. मी देखील दिनदयालबरोबर निर्लज्ज होत चाललो होतो. तेवढ्यात एक तरुणी एक तरुणाच्या तोंडावर बसून त्याच्या ओठावर योनी रगडू लागली. तशीच ती खाली झुकली. तरुणाचा दांडका ती तोंडात घेवून चोखू लागली. तो तरुण तिच्या योनीत दांडका आतबाहेर करत होता. तीही त्याच्या ओठांवर योनी रगडत होती. अंजली आणि मयुरी डोळे फाडून ते दृश्य पाहत होत्या. मी आणि दिनदयालही श्वास रोखून तो अनोखा खेळ पाहत होतो. तेवढ्यात माझ्याकडे पाहत अंजली म्हणाली. ‘हेमंत… ते दोन्ही तरुण एका तरुणीची योनी आणि मागचे भोक दांडक्याने ठोकून काढतील बघ..’ आज माझीही इच्छा त्या तरुणीसारखी झाली आहे. मी चमकून तिच्याकडे पहिले. आमच्या दोघांच्या दांडक्यांनी योनी आणि मागचे भोक एकाचवेळी ठोकून घेण्याची तिची इच्छा होती. याचा अर्थ ती मला मागचे भोक चावायला लावणार की काय? तेवढ्यात तिने मला बेडवर उताणा केला. ती चटकण माझ्यावर आली. माझ्या ओठावर योनी रगडत म्हणाली, ‘ हेमंत माझी योनी चाट ना…’ मी तिची योनी चाटू लागलो. तिच्या योनीचा गंध माझ्या नाकात शिरत होता. माझी जीभ तिच्या योनिवरून फिरत होती. आणि ती फिरून माझा लंड आपल्या तोंडात घेऊन चोकू लागली. दीनदयाललाही तिने ओढवून घेतले आणि दोघांच्या कडून तिने आपली कामवासना भागवून घेतली.


बहिणीच्या गांडीची मजा

हेलो मित्रांनो मी नीरज आज तुम्हा सर्वांना एक खरी गोष्ट सांगणार आहे जी काही दिवसापूर्वी माझ्या बरोबर घडली होती. मी कधी मनात विचार केलेला नव्हता की असे काही माझ्या बरोबर घडेल पण ती घटना घडली आणि माझे आयुष्य बदलून गेले. मित्रांनो ही गोष्ट आहे माझ्या बहिणी बरोबर माझ्या जवाजवीची.

मित्रानो मी पुण्याला राहतो आणि माझे कुटुंब खूप छोटे आहे. त्यामध्ये मी, माझे आई, वडील, आणि माझी एक बहिण जी माझ्या पेक्षा वयाने चार वर्षे मोठी आहे. ती बी. कॉम. पास आहे आणि आता पुढचे शिक्षण घेत आहे. मी यावेळी बी. कॉम. शिकत आहे.

मित्रांनो ही गोष्ट एक वर्षापूर्वीची आहे जेव्हा माझ्या दीदी चे वय २३ होते आणि तेव्हा मी १९ चा होतो. मीत्रानो त्या दिवशी माझ्या बहिणीला मुलगा पाहायला येणार होता, माझी दीदीचे नाव सोनिया आहे आणि आम्ही प्रेमाने तिला सोना म्हणून हाक मारतो. ती दिसायला एकदम सेक्सी बॉम्ब आहे आणि ती एकदम काजोल सारखी दिसते, तिची गांड पाहून कुणाचाही लंड उभा होऊ शकतो आणि मी तर तिच्या गांडीचा वेडा आहे.

मी आणि दीदी लहान पणापासून एकाच खोली मध्ये झोपतो, पण आमचे बेड वेग वेगळे होते. मित्रांनो त्या रात्री ती खूप खुश होती, कारण दुसऱ्या दिवशी तिचे लग्न ठरणार होते. जेव्हा आम्ही जोपत होतो तेव्हा दीदी ने मला हसत हसत शुभ रात्री म्हणून म्हणले आणि आम्ही झोपलो. मी सकाळी उठून पहिले तर सकाळचे सहा वाजले होते.

मी उठून पहिले तर दिदीची कमीज वर होती आणि तिची ब्रा पण वर आलेली होती त्यामुळे तिचे बॉल बाहेर पडले होते आणि तिची सलवार खाली उतरली होती आणि तिचा हात तिच्या पेंटी मध्ये होता. मित्रांनो ते पाहून पहिल्यांदा मला दीदी विषयी वाईट विचार मनात आला आणि हे पाहून कुणाचाही लंड ताठला असता. मी तिथेच मुठ मारायला सुरुवात केली आणि मी वीर्य सोडले तेव्हा उठून अंघोळ करायला निघून गेलो आणि परत आलो आणि पहिले तर दीदी अजून तशीच झोपलेली होती.

मी तिच्या जवळ गेलो आणि तिचे निपल ला हात लावू लागलो आणि मग तिचे बॉल हातामध्ये घेतले. मग मी थोडा खाली गेलो आणि जिभेने तिचे बॉल चाटू लागलो आणि ती जागी जाली आणि घाबरली आणि बरोबर मी पण घाबरलो. मी तिला विचारले दीदी तुम्ही अशा अवस्थेत का आणि कशा आहे? तर ती मला म्हणाली मूर्ख तू हे सर्व काय करीत आहेस?

मग मी म्हणालो दीदी काही नाही आणि मग ती म्हणाली चल तिकडे बघ तर मी माझे तोंड दुसरीकडे फिरवले. मग तिने तिचे कपडे सरळ केले आणि अंघोळ करायला निघून गेली, पण माझा लंड अजून टोवेल मध्ये ताठ्लेला होता आणि तो दिदिने पहिला होता. मग दुपारी जेव्हा दीदीला पाहायला मुलगा आला तेव्हा ती खूप खुश होती. जेव्हा तिला बोलवले गेले तेव्हा ती लाजत लाजत चहा घेऊन बाहेर आली. तिने एक एक करून सर्वांना चहा दिला, आणि तिने मुलाकडे पाहून स्माईल दिली. जेव्हा ती चहा द्यायला वाकत होती तेव्हा तिची छाती स्वच्छ दिसत होती आणि ते पाहून माझा लंड पूर्ण ताठला होता आणि जेव्हा मी मुलाला पहिले तर तो पण दिदीची छाती पाहत होता. मग काही वेळ ते बसले आणि तिचे लगीन ठरले.

मग जेव्हा सर्व लोक निघून गेले तेव्हा संध्याकाळी आई आणि दीदी किचन मध्ये भांडी स्वच्छ करीत होत्या आणि मी किचन मधून बाहेर उभा राहून दिदीची गांड पाहत होतो. तेव्हा आईने मला पहिले आणि मला आत बोलवले आणि मला सांगितले कि तू दिदीची थोडी मदत कर मी जरा शेजारच्या काकू कडे जाऊन येते. मी मनातल्या मनात खुश झालो, आई तिथून बाहेर गेली आणि मी दीदी बरोबर बोलू लागलो. मी तेव्हा तीला म्हणालो कि तू या ड्रेस मध्ये खूप सुंदर दिसत आहेस.

ती : थेंक यु भाई.

मी : दीदी आज सकाळी तू उठलीस तेव्हा असे कापडे का घातले होते? रात्री तुला काही जाले होते का?

ती : नाही रे, मला रात्री ना खूप उकडत होते.

मी : बरे आता सांग तुला मुलगा कसा वाटला?

ती : लाजत म्हणाली खूप चांगला.

मी : बरे दीदी आता तुझे लग्न होणार.

ती : चल वेडा कुठला.

मी : दीदी मला तुझे मम्मे खूप आवडले ते खूप मोठे आणि नाजूक मुलायम आहेत.

ती : गप्प बस वेड्या सारखा बोलू नको.

मी : दीदी खरोखर तुझे ब्बोल खूप मस्त आहेत.

ती : तुला कसे माहिती?

मी : मी सकाळी हात लावून पहिले होते.

ती : तुला अजिबात लाज वाटत नाही का? तुझ्या बहिणीला बॉल वर हात लावतोस.

मी : मी काय करणार दीदी? तुम्हाला माहित होते कि मी रूम मध्ये आहे तरी तुम्ही असे झोपलात.

ती : चल आता राहू दे ती गोष्ट.

मग रात्र झाली आणि आम्ही झोपू लागलो तेव्हा झोपताना तिने मला पहिल्यांदा शुभ रात्री कीस केली, मी तर एकदम वेडा झालो आणि दीदी च्या बेडवर गेलो आणि मी पण तिला गालावर एक जोरदार कीस केली आणि आम्ही झोपलो. मग जेव्हा मला जाग आली तेव्हा मी पहिले कि तिचे डोळे बंद आहेत आणि तिचा एक हात तिच्या बॉल वर आणि एक हात तिच्या पेंटी मध्ये आहे. ती त्यावेळी पुच्ची मध्ये बोट घालत होती. मी कान द